Saturday, December 1, 2012

ग्रहों की पंचायत और राहु का दखल

इस संसार मे दो लोग जीवन मे तरक्की नही कर पाते है एक वे जो कुछ नही जानते है और एक वे जो सब कुछ जानते है। नही जानने वाला व्यक्ति अपनी जरूरत के अनुसार विषय वस्तु को प्राप्त करता रहता है और जीवन साधारण तरीके से निकल जाता है। जानने वाला व्यक्ति लोगो को बताते बताते अपना जीवन निकाल देता है और उसका जीवन भी अपने बारे मे कभी नही सोचने के कारण साधारण रूप से ही निकल जाता है। प्रस्तुत कुंडली के अनुसार मीन लगन की जातिका है और लगनेश गुरु छठे भाव मे वक्री होकर विराजमान है लेकिन लगनेश के मालिक सूर्य लगन मे ही विराजमान है,इस प्रकार से सूर्य और गुरु का परिवर्तन योग भी पैदा हो जाता है। जातिका के लिये कभी तो दिमागी रूप से सूर्य जैसी चमक चाहिये और कभी छठे गुरु जैसी लोगो की सहायता करने की आदत उनकी दुख पीडा को दूर करने के उपाय आदि। जातिका के लिये गुरु एक प्रकार से फ़लदायी तभी बनता है जब वह अपने अनुसार अपनी सर्वोच्च याददास्त का प्रयोग करे,कारण गुरु वक्री जब कुंडली मे बैठता है तो वह उसी भाव और राशि का प्रभाव इतना अधिक दे देता है कि जो साधारण लोग तीन साल मे कर पाये वह एक साल मे ही कर देता है। कुंडली मे लगन मे एक साथ पांच ग्रह की पंचायत है यह पंचायत शुक्र बुध शनि राहु सूर्य की है। इस पंचायत के सामने केवल केतु ही सहायक है बाकी चन्द्रमा शिक्षा के अन्दर है और गुरु रोजाना के काम काज के लिये अपनी युति कभी कभी दे देता है। इस पंचायत का प्रभाव साधारण रूप से समझने के लिये लगन को कढाही समझा जाये और ग्रहों को सब्जियों के रूप मे देखा जाये तथा सप्तम के केतु से पकाने की आग का रूप दिया जाये वक्री गुरु को सब्जियों के प्रति पकाने के समय ध्यान रखने का कारक समझा जाये,तथा मंगल को इन सब्जियों का रखवाला माना जाये,तो एक विचित्र बात पैदा होती है। मीन राशि का शुक्र आसमानी बादलो की तरह से है,जिन्हे देख तो सकते है लेकिन पकड नही सकते है अथवा उनका प्रयोग भी नही कर सकते है यह बादलो की मर्जी है कि वे बरसात देकर जमीन की प्यास बुझा दें या जमीन पर घनघोर बारिस देकर जमीन को दलदल बनादे या तालाब बनाकर सराबोर कर दें। मीन राशि का बुध हवा मे उडता हुआ गुब्बारे की तरह से है वह चलने वाली हवा पर निर्भर होता है अगर हवा गर्म है तो ऊंचा उठता जायेगा और हवा सर्द है तो जमीन की तरफ़ नीचे आता जायेगा,जिस दिशा की हवा चलेगी उसी दिशा मे चलता चला जायेगा,और कभी भी बिना किसी कारण के सीमा तक पहुंचने के पहले ही या सीमा तक जाने के बाद भी अपनी गति को कायम रखेगा या गति से विहीन होकर जमीन पर गिर कर फ़ूट जायेगा। मीन राशि का शनि हवा मे लटके पत्थर की तरह से है,वह दिवालो का सहारा लेकर खडा कर दिया जाये तो छत के रूप मे होता है और उसे अगर रहने वाले स्थान के रूप मे देखा जाये तो वह जन्म के बाद के स्थान को हमेशा के लिये त्याग कर दूसरे स्थान पर चला जाये केवल याददास्त मे रखा जाये कि अमुक शान पर पैदा हुये थे। मीन राशि का राहु अनन्त आकाश की कल्पना है,आकाश को देखा जा सकता है लेकिन उसकी सीमा का आकलन नही किया जा सकता है,वह प्रकाश के कारणो को समझ सकता है प्रकाश की गति से द्रश्य और अद्रश्य हो सकता है,इस राहु को एक ऐसे शिक्षा संस्थान के बारे मे या एक ऐसे निवास के बारे मे भी कल्पित किया जाता है जैसे एक जेल एक कालेज जहां से बिना अन्य की मर्जी से बाहर भी नही निकला जा सकता है और जहां से अपनी मर्जी से कोई काम भी नही किया जा सकता है सभी काम दायरे से बाहर के होते है,केवल राहु से सप्तम के केतु की खाली जगह को भरने के लिये ही इसका प्रयोग किया जा सकता है। मीन राशि का सूर्य आसमान मे चमकता हुआ सितारा भी है और सुबह के पहले प्रहर का उदय होता प्रकाश भी है जो प्रकाश अपनी सीमा को बढाने मे है एक आत्मा के रूप मे अगर देखा जाये तो आसमान से जगत को देखती हुयी आत्मा के रूप मे है वह देख सकता है लेकिन उसे करने के लिये साधनो के रूप मे कुछ भी प्राप्त नही है वह प्रकाश दे सकता है जिससे लोग देख सकते है वह गर्मी दे सकता है जिससे लोग अपने जीवन को चला सकते है,लेकिन खुद के लिये कोई भी कुछ नही कर सकता है।
इस प्रकार से ग्रहों की पंचायत का सम्मिलित रूप जो सामने आता है उसके अनुसार इस जातिका के जीवन को ख्याली जीवन के रूप मे देखा जा सकता है।कुंडली मे अकेला ग्रह केतु ही पूरी पंचायत से टक्कर लेने के लिये माना जाता है और केतु के कारण ही जातिका को केवल सहायता के काम और लोक हित के काम करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। यह केतु जातिका को कन्या राशि से सम्बन्धित कारको को प्रसारित करने का कारण पैदा करता है,यह कारण केतु के पीछे बैठे गुरु वक्री की योग्यता के अनुसार ही माना जा सकता है जैसा गुरु प्रभाव देता है वैसा ही केतु अपने अनुसार प्रसारित करने की अपनी योग्यता को सामने रखता है।गुरु और केतु दोनो ही डाक्टरी प्रभाव भी देते है अगर चिकित्सा के कारक ग्रह शनि और राहु केतु और गुरु को अपना असर प्रदान करते है। केतु के लिये तब और मुश्किल पैदा हो जाती है जब मंगल से केतु का षडाष्टक योग पैदा हो जाता है केतु मंगल को अपनी जड से उखाडने वाली नजर से देखता है और मंगल केतु को अपने लिये सहायक का काम करने के लिये सामने रखता है। मैने पहले भी कहा है कि केतु कलम है और वह उसी भाव और राशि के असर को जीवन मे लिखता है जिस भाव या राशि मे वह स्थापित होता है। केतु को लिखने के लिये जो विषय जातिका के सामने आते है वह शुक्र से आंखो की बीमारी स्त्री सम्बन्धी बीमारी प्रजनन सम्बन्धी बीमारी और उसके निदान के लिये बुध से स्नायु सम्बन्धी बीमारी खोपडी के विकार आदि के कारण शरीर के नर्व सिस्टम के लिये प्रकाशित करना शनि से बुद्धि के जडता वाले रोग शरीर के बाल खाल त्वचा वाले रोग एक साथ रहने पर लगने वाले छूत वाले रोग आदि के लिये तथा राहु से शरीर के इन्फ़ेक्सन कानो के इन्फ़ेक्सन छूत से लगने वाले रोग पेट और सांस के अन्दर लगने वाले रोग जननांग सम्बन्धी रोग जो सहसवास और अनैतिक सम्बन्धो के कारण पैदा होते है आसमानी रोग जैसे अचानक बीमार हो जाना डर जाना आदि वाले रोगो के लिये जाना जाता है। चन्द्रमा के पानी की राशि और राज्य के भाव मे होने से चन्द्रमा पानी वाले रोग पानी के कारण शरीर मे व्याप्त रोग सांस की दिक्कत जुकाम का अधिक बना रहना मोटापा और मनोवैज्ञानिक रोग के लिये जानकारी देते रहना,केतु से पेट के अन्दर आंतो वाले रोग पेट की बीमारिया पाचन क्रिया आदि के रोग भी केतु से जाने जाते है। सूर्य से हड्डी वाले रोग नेत्र रोग आंखो में लगने वाली चोटो के रोग पैरों के पंजो मे होने वाले रोग आदि के लिये भी सूर्य अपनी पहिचान को देता है। इस सभी ग्रहो की आपसी युति के लिये भी एक साथ इतने कारण बन जाते है कि उनका विश्लेषण करने पर बहुत बडी व्याख्या की जा सकती है और एक साधारण आदमी के लिये यह एक असम्भव जैसी बात हो सकती है।
अक्सर मीन राशि का राहु अचानक दिमाग को बदलने वाला होता है और जब देखो तभी किसी न किसी प्रकार से बने बनाये गणित को समाप्त कर देता है किसी भी प्रकार से सोचे गये काम को नही होने देता है और जो भी काम बन भी रहा हो तो केवल अपनी शक्ति से अचानक समाप्त कर देता है। राहु के साथ शनि के मिल जाने से शक्ति के रूप मे दवाइयों की जानकारी देता है और अचानक पारिवारिक स्थिति मे अपनी युति बनाकर काली आंधी के रूप मे सामने समझ मे आता है यह शनि राहु कृष्ण भक्ति के प्रति भी धारणा बना देता है और किये जाने वाले कामो मे भगवान श्रीकृष्ण की उपस्थिति को आधार बनाकर चलने वाला होता है।अपने माता पिता के प्रति समर्पित होता है और आजीवन अपने सुख आदि को त्याग कर खुद के माता पिता के प्रति एक छतरी की तरह से तना रहकर अपनी सेवाओ को देता है। राहु के साथ जब सूर्य का मिलना होता है तो उम्र की बयालीस साल के बाद से ही स्थिति मे सुधार आने की बात मिलती है और बयालीस साल तक दूसरो पर ही निर्भर रहना पडता है जितना भी काम किया जाये वह एक प्रकार से फ़ूस के झोपडे जैसा ही असर प्रदान करने वाला होता है। रोज मर्रा की जिन्दगी मे अपनी स्थिति को हमेशा शंका और भ्रम से पूर्ण रखने के कारण आगे भी नही बढने देता है। मीन राशि का सूर्य राहु के घर मे ही होता है जो भी किया जाता है वह भ्रम और लोगो की शंका को दूर करने के लिये एक प्रकार से बडे संस्थान जैसे काम करता है लेकिन केतु की वजह से वह केवल अपने विचार शनि शुक्र की युति वाले कारक कागज पर उतारने के अलावा बुध राहु के संयोग से कम्पयूटर पर डिजायन बनाना आंकडो को लिखना फ़ार्मूला प्रकाशित करने की कल्पना करना आदि बाते मानी जाती है लेकिन बुध और राहु के असीमित गणित के कारण जो भी फ़ार्मूला आदि चिकित्सा क्षेत्र के लिये बनाये जाते है वह साधारण व्यक्ति की समझ से बाहर होने की बजह से भी प्रयोग मे नही लिये जा सकते है।
अक्सर सूर्य शनि की युति के साथ चन्द्रमा का नवम पंचम का योग होने से जातक अपने माता पिता के रहते अपने जीवन के लिये कुछ भी नही सोच पाता है उसे अपने माता पिता का किसी भी कारण से ख्याल रखना होता है और उन ख्याल रखने वाली बातो से तथा किसी पर भी उनके लिये की गयी सेवा से संतुष्टि नही मिलने से जातिका अपने द्वारा ही की गयी सेवा भाव से संतुष्ट रहता है।मीन राशि के सूर्य के लिये एक बात और भी देखी जाती है कि जातक को जो भी राजकीय सम्मान या विदेशो मे प्रसिद्धि का कारण बनता है वह जीवन के अन्तिम समय मे या मृत्यु के बाद ही सम्मान मिलने की बात देखी जाती है इसी प्रकार से शनि की सूर्य से युति मीन राशि मे होने से जातक को समझने के लिये कई वैज्ञानिक एक साथ विचार विमर्श करते है तभी जाकर जातिका की छवि और उसके ज्ञान का आकलन कर पाते है एक व्यक्ति अगर जातिका के बारे मे समझना चाहता है तो वह जातिका के बराबर का ज्ञान रखे तभी सम्भव माना जा सकता है अन्यथा जातिका के ज्ञान के स्वरूप अलग अलग ग्रहो से पूर्ण शक्ति वाले ग्रह ही जातिका के लिये अपनी समझ को प्रसारित कर सकते है जैसे कुंडली मे बुध राहु शनि राहु सूर्य राहु शुक्र राहु आदि की युति रखते हो।
जातिका के परिवार के लिये अगर देखा जाये तो जातिका के दादा तीन भाई होते है और वे अपनी पैत्रिक जायदाद को छोड कर बाहर जाकर बसे होते है। दादा का स्थान जातिका के पैदा होने के स्थान से दक्षिण-पूर्व दिशा की तरफ़ होता है जातिका के पिता अपने पैत्रिक कारणो को सम्भालने मे कालेज शिक्षा न्याय आदि के कारणो से जुडे होते है माता का प्रभाव भी इन्ही क्षेत्रो के कारको से निबटने के लिये माना जाता है जातिका की छवि भी अपनी माता से मिलती है और दांतो की बनावट बहुत ही खूबशूरत होती है। जातिका का ख्याल केवल अपने पुराने जीवन से जुडा होता है वह इतिहास के बारे मे अधिक जानती है और अपने परिवार के पूर्व इतिहास को बताने मे रुचि रखती है। जातिका को भावुक भी माना जाता है और वह अपनी भावना को प्रकट करने के लिये ऊपर लिखे ग्रहो के अनुसार ही अपने को प्रसारित कर सकती है। अधिक सोचने और अधिक स्मय एकान्त मे व्यतीत करने से तथा बाहरी कारणो को लगातार ध्यान मे रखने से घटनाओ के अधिक समय तक याद रखने से शरीर के अन्दर यह राहु और चन्द्रमा मिलाकर एक प्रकार का एसिड तैयार करता रहता है जिससे आंखो पर भी असर पडता है सांस लेने के कारणो मे भी दिक्कत आती है और मानसिक बोझ भी बढता है, इस कारण से जातिका को मोटापे का शिकार भी होना पडता है अथवा अधिक एसिड बढ जाने से भोजन करने के बाद पेट का अफ़ारा आंतो का सही रूप से काम नही करना आदि बाते भी मानी जा सकती है। शुक्र राहु की युति से जातिका के अन्दर के प्रकार से अनगिणत रूप से आगे बढने का मानसिक प्रभाव भी उत्तेजना देने के लिये माना जा सकता है और जातिका की चाहत होती है कि वह अपने नाम और धन के साथ बहुत आगे बढने के लिये अपनी सीमा रेखा को बना सके उसके पास दो सहायक होते है जो उसके लिये अपनी भावनाओ से प्रकट करने की योग्यता रखते है लेकिन आपसी बहस करने और आपसी विचार एकत्रित नही होने के कारण अक्सर बातचीत मे तर्क वितर्क की मात्रा भी बढ जाती है।
वर्तमान मे चन्द्रमा से चौथे घर मे शनि के आजाने से तथा सूर्य से अष्टम मे शनि के आने से जो भी जातिका के द्वारा कार्य किया गया है उसे परखने का और समझने का समय शुरु हुआ है सूर्य से पिता के अष्टम मे शनि के आने से पिता को पाचन क्रिया सम्बन्धी बीमारिया और भोजन का नही पकना और लैट्रिन आदि की समस्या का कारण बनना माना जाता है तथा माता के चौथे भाव मे शनि के आने से माता को यात्रा वाले कारणो मे जाना साथ ही सर्दी वाली बीमारियों का होना छाती मे जकडन आदि होना भी माना जा सकता है। इस समय की युति से माता के लिये छाती मे जकडन का हो जाना और कफ़ का जमा हो जाना भी माना जा सकता है लेकिन खुद के दूसरे मंगल की द्रिष्टि इस चन्द्रमा पर होने से माता पर दवाइयों का प्रयोग भी सही समय पर किया जाना माना जा सकता है। राहु का गोचर आने वाले जनवरी 2013 तक नवम भाव मे रहने से पिता के लिये आक्समिक आघात का समय भी माना जा सकता है साथ ही राहु का गोचर अष्टम मे होने से निवास से दक्षिण पश्चिम दिशा में व्यापारिक चिकित्सालय मे काम करना भी माना जा सकता है। इसके अलावा नवम्बर 2014 से शनि की युति जब लगन के ग्रहो से होगी तभी जातिका के द्वारा लिखे गये और मानसिक तथा बुद्धि के कारणो से प्रकाशित कथनो के प्रति जैसे प्रकाशित होना और प्रकाशित होने के बाद उनके प्रसारण आदि की बाते मानी जा सकती है,वही समय जातिका के लिये धन और सम्मान से उदय होने का समय माना जा सकता है।

12 comments:

  1. गुरुदेव...
    सादर चरण स्पर्श ......

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  2. मेरी विनती सुन लीजिये गुरुदेव......

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    1. प्रतीक जो भी पूंछना या समझना है उसे ईमेल से भेजिये.साथ मे जन्म विवरण भी होना चाहिये,ईमेल है -astrobhadauria@gmail.com

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  4. गुरुदेव मैंने ईमेल भेज दिया हे........क्या मैं आप से फ़ोन से संपर्क कर सकता हूँ.........

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  5. Gurudev pranam..meri kundli me b 5 graho ki yuti h, ekadash bhav me tula lagn ki kundli h.

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  6. Gurudev pranam..meri kundli me b 5 graho ki yuti h, ekadash bhav me tula lagn ki kundli h.

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  7. Dob 25.04.1980
    Birth time 7.10 pm
    Place, Narwar m.p.
    Is prakar ki kundli ka phaladesh kaise hoga..kripya jaankari dijiye.

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  8. Dob 25.04.1980
    Birth time 7.10 pm
    Place, Narwar m.p.
    Is prakar ki kundli ka phaladesh kaise hoga..kripya jaankari dijiye.

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  9. Gurudev pranam..meri kundli me b 5 graho ki yuti h, ekadash bhav me tula lagn ki kundli h.

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  10. 12|12/1993 rime:3:29pm kanpur.. ankur...
    Sir mere me 5 grah yuti h surya sukra budh chandra rahu 8ve bhav me h mera lagan mesh h rasi beschikbaar h guru 7 ghar me h 2nd house me ketu h.. 9ve house me mangel h 11 bhav me shani h.. pr 8ve bhav me 5 grah h rahu j saat

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