Thursday, March 7, 2013

तुला राशि का जन्म का राहु

भचक्र से तुला राशि सातवी राशि है और इस राशि का महत्व जीवन साथी साझेदार जीवन मे लडी जाने वाली जंग तथा सेवा आदि से प्राप्त आय सेवा के प्रति समाप्त करने वाले कारण सन्तान की हिम्मत और सन्तान कैसी है किस प्रकार के आचार विचार उसके अन्दर है वह अपने को समाज मे किस प्रकार के क्षेत्र से जुडकर अपने को संसार मे दिखायेगी माता के घर और माता की मानसिक स्थिति को पिता के कार्य को और कार्यों से जुडे धन आदि की समीक्षा करने के लिये अपनी क्रिया को करेगी. राहु को वैसे छाया ग्रह कहा जाता है,इसके साथ ही राहु के बारे मे कहा जाता है कि ऐसा कोई भी कारक नही है जो आसमान से नही जुडा है चाहे वह अच्छा हो या बुरा सभी की शक्ति को समेटने के लिये राहु का प्रभाव बहुत ही बडे रूप मे या आंशिक रूप से समझना जानना जरूरी है। तुला राशि का राहु मानसिक रूप से अपने को हमेशा उपरोक्त कारणो से जोड कर रखता है और इस राहु का प्रभाव घर के सदस्यों में अच्छे और बुरे रूप से भी देखा जाता है। जिस दिन इस राहु के साथ जन्म होता है उसके अठारह महिने पहले से ही घर के बुजुर्ग सदस्यों पर असर को देखा जाने लगता है। राहु का प्रभाव पिता के बडे भाई पर पहले पडता है इसके बाद यह प्रभाव बडे भाई या बहिन पर पडता है फ़िर इसका प्रभाव छोटे भाई बहिन पर भी पडता है । इसके साथ ही जातक की आमदनी के क्षेत्र पर जातक एके भेषभूषा पर भी पर इसका असर पडता है इस राहु के कारण पैदा होने वाले जातक अक्सर सबसे पहले बायें हाथ से लिखने पढने वाले या इस हाथ से काम करने के लिये पहले ही अपने को उद्धत करते है अक्सर यह भी देखा जाता है कि इस राशि मे राहु वाले व्यक्ति अपने को जीवन साथी के भरोशे ही रखते है उनके लिये कोई भी काम करना मुश्किल होता है जबतक कि वे अपनी भावना को आशंका को अपने जीवन साथी से न बता दें,यह भी देखा गया है कि इस राशि का राहु पति पत्नी के बीच मे एक प्रकार का आशंकाओं का जाल भी बुन देता है और दोनो के बीच मे वाकयुद्ध कारण अक्सर घर का माहौल तनाव वाला बन जाता है और कुछ समय के लिये ऐसा लगता है कि पति पत्नी मे एक ही रहेगा। इस राशि के राहु वाला व्यक्ति पैदा होने के बाद एक प्रकार से आवारगी का जीवन बिताने के लिये भी माना जाता है वह कहां जा रहा है किसके लिये जा रहा है,उसे खुद पता नही होता है। इसके अलावा भी कई शास्त्रो ने अपने अपने अनुसार कथन किये है जो आज के युग मे कम ही फ़लीभूत होते देखे गये है।

कहा जाता है कि तुला राशि का राहु व्यक्ति के अन्दर अधिक कामुकता को देता है और कामुकता के कारण व्यक्ति का सम्बन्ध कई व्यक्तियों से होता है। यह बात मेरे अनुसार तभी मानी जाती है जब राहु शुक्र या गुरु पर अपना असर दे रहा हो तो शुक्र पर असर होने के कारण पति के प्रति कई स्त्रियों से सम्बन्ध बनाने के लिये और पत्नी पर अपने को सजाने संवारने के प्रति अधिक देखा जाता है जब यह जीवन की जद्दोजहद मे आजाता है तो व्यक्ति एक से अधिक कार्य करने साझेदारी और इसी प्रकार के कामो से अपने को आगे बढाने के लिये भी देखा जाता है। तुला राशि का राहु शुक्र के घर मे होने से और व्यवसाय के प्रति अपनी सोच रखने के कारण व्यक्ति को हर मामले मे बडी सोच देकर व्यवसाय के लिये अपनी समझ को देता है। अक्सर इस असर के कारण ही कई लोग तो आसमान की ऊंचाइयों मे चले जाते है और कई लोग अपने पूर्वजो के धन को भी अपनी समझ से बरबाद करने के बाद शराब आदि के आदी होकर अपने जीवन को तबाह कर लेते है। जिन लोगो ने विक्रम बेताल की कथा को पढा होगा उन्हे इस राहु का पूरा असर समझ मे आ गया होगा,यह राहु एक भूत की तरह से व्यक्ति के ऊपर सवार होता है और अपनी क्रिया से जीवन की वह बाते सामने ला देता है जिन्हे हर कोई अपनी बुद्धि से सामने नही ला सकता है जैसे ही व्यक्ति अपनी बुद्धि का प्रयोग करता है यह राहु का नशा अपने आप ही पता नही कहां चला जाता है। इस राहु का नशा एक प्रकार से या तो बहुत ही भयंकर हो जाता है और उतारने के लिये व्यक्ति पुलिस स्टेशन लाया जाता है,या इस राहु के नशे को उतारने के लिये अस्पताल काम मे आते है या इस राहु का नशा उतारने के लिये धर्म स्थान अपना काम करते है इसके अलावा इसका नशा तब और भी खतरनाक उतरता है जब व्यक्ति अपनी धुन मे चलने के कारण सडक या किसी अन्य प्रकार के कारण से दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है।



26 comments:

  1. गुरुजी प्रणाम,

    बहुत ही सुन्दर लिखा है! गुरुजी वृष लग्न में धनु राशि में राहु और मंगल की युति के बारे में लिखेगे तो बड़ी ही कृप्या होगी.

    धन्यवाद

    ReplyDelete
    Replies
    1. राकेश समय आने पर जरूर लिखूंगा इंतजार करो.

      Delete
  2. गुरुजी प्रणाम,

    विक्रम मतलब हम वेताल मतलब किस्मत और विक्रम बोला मतलब की अंहकार की बोली अगर बोली तो किस्मत गयी!
    ग़लती की माफी.
    आपका बच्चा
    राकेश वैद

    ReplyDelete
  3. अहंकार भी एक नशा है,यह बेताल से कम नही है,बेताल का शाब्दिक अर्थ भी बिना तालमेल का है जब तक ताल मेल नही बैठता है तब तक किसी प्रयोग का नही है राहु भी अपनी युति से हर काम को बिना ताल का बना देता है.खुश रहो मजे करो.

    ReplyDelete
  4. गुरुजी प्रणाम,

    शब्दों की गहराई में उतराने की आज आपने शुरुआत करवा दी. आपका फिर से आभार प्रकट करता हुँ!
    जिस दिन आपका नया ब्लाग पड़ने को नहीं मिलता ऐसा लगता है, जैसे रोटी नहीं खाई सारा दिन.
    काश आपका सनि्धय पहले से प्राप्त होता तो ये जीवन शर्तिया कुछ और होता!
    धन्यवाद
    राकेश

    ReplyDelete
  5. बहुत अच्छा लगा कि कम से कम शब्दो का ध्यान जो हिन्दी मे ही अधिक समझ मे आते है के प्रति रुझान बढा ! खुश रहो मजे करो.

    ReplyDelete
  6. मेरे पिता का इसी 5 मार्च को 58 साल की उम्र मे ह्रदयगति रुकने से निधन हो गया .मेरा तो संसार ही उजड गया .मेरा दिमाग भी नहीं कम कर रहा है . मुझे ये जानना है की भगवान ने मेरे साथ इतना क्रूर मजाक क्यों किया. और मेरे संत जैसे पिता को क्यों उठा लिया .और उनका अगला जन्म कब और कैसा होगा .

    ReplyDelete
  7. अक्षय जी पृथ्वी की गति अपने अनुसार जारी है,जीवो का आना जाना भी लगातार जारी है जैसे एक सीजन वाले पेड पर बीज बनते है और बीज बनाने के बाद पेड की कीमत से अधिक बीजो की कीमत होती है,वह बीज नये पेड का सृजन करते है,मनुष्य जीवन भी प्रकृति पर निर्भर है,आना जाना जारी है,आपके पिता आपके रूप मे विद्यमान है,उनके द्वारा किया गया सृजन और अधिक बडे रूप मे करने के लिये आप अग्रसर है,मुझे बहुत अच्छा लगा कि आज के भौतिक युग मे जहां लोग पिता को केवल रिस्ते का चैक समझते है वहीं पर आप अपने पिता के प्रति इतना समर्पित है,यह भाव बनाकर रखना,भगवान तुम्हे भी पिता बनायेगा और तुम्हारे बच्चे भी तभी तुम्हे याद रख पायेंगे जब आप अपने पिता को याद रखेंगे,यह प्रकृति की लीला है जिसे आज तक कोई नही रोक पाया है,अगर यह रुक गयी होती तो आज जीवो की संख्या सम्भाले नही संभलती.अपने दिमाग को उनके किये गये सद्कर्मो की तरफ़ लेजाओ,उनके द्वारा सोचे गये कार्य पूरे करो,यही उनके प्रति सच्ची और मर्यादित श्रद्धान्जलि होगी.ईश्वर आपको उनके विछोह को सहने की शक्ति प्रदान करे.

    ReplyDelete
  8. गुरुजी प्रणाम,

    गुरुजी कल सोमवती अमावस्या पर क्या करना चाहिए जिससे पितरों की कृप्या प्राप्त हो. मार्गदर्शन करने की कृपया करे!

    धन्यवाद
    राकेश

    ReplyDelete
    Replies
    1. www.astrobhaauria.wikidot.com मे पुरानी बेवसाइट मे इस बारे मे पितृ तर्पण के प्रति लिखा गया है उसे पढे.

      Delete
  9. guruji sure+rahu= grehan yog, budha+chandrma= tarangi yog, aanshik kal sharp yog.inka khandan kaise kare

    ReplyDelete
  10. सन्तोष सूर्य राहु का भाव के अनुसार ही ग्रहण योग माना जाता है राहु दादा है और सूर्य पिता के कारको मे है अगर दादा पिता साथ साथ रहे होते है तो ग्रहण योग कैसे हो सकता है,यह त्रिकोण की स्थिति और मेष सिंह धनु के लिये देखा जाता है साथ ही अगर यही राहु सूर्य अष्टम मे होता है और वृश्चिक राशि का प्रभाव होता है तो ग्रहण योग भी होता है और दादा के द्वारा अपनी स्थिति को बदला गया होता है तथा सूर्य जो पिता का कारक है दादा के कृत्यो से अपने परिवेश को त्याग कर दूर कहीं जाकर बसा होता है आदि बाते देखी जाती है,बुध चन्द्रमा को तरंगी योग की परिभाषा मे तभी माना जाता है जब राहु का असर किसी न किसी रूप से दूसरे छठे और दसवे प्रभाव से होता है कारण बुध बुद्धि और चन्द्र्मा मन का कारक है जब राहु का असर इन भावो से आयेगा तो व्यक्ति के अन्दर तामसी चीजे लेने की तरंग चौथे भाव मे होगा तो मन से बातो को कहना और अपनी बात को सच्ची या झूठी साबित करने की कोशिश करना तथा अष्टम मे होने से माता बहिन बुआ बेटी की इज्जत को नही समझना केवल ब्रोकर वाले कामो से कोई मरे या कोई जिये अपने फ़ायदे की लौ लगना आदि बाते मानी जाती है.

    ReplyDelete
  11. नमस्कार गुरु जी हमेशा आपके लेखो का दीवाना रहा हु
    आज पहेली बार लिख रहा हु
    गुरु जी मेरे उपर राहू का भुत ला हुवा है एक तो शराब तम्बाकू और नशे की आदते लगी हुयी है , और मेरी सगाई अभी हुयी है पर मुझे मेरी साली या कोई दूसरी पसंद है ,. क्या करू
    11/12/1983 time 10.10 pm ,ahmedabad ,,कर्क लग्न , शतभिषा नक्षत्र
    मंगल तृतीय ,,शनि शुक्र तुला में , गुरु केतु सूर्य पंचम स्थान में , बुध षष्ठं , चन्द्र अष्टम , राहू एकादश में

    ReplyDelete
  12. नमस्कार गुरु जी हमेशा आपके लेखो का दीवाना रहा हु
    आज पहेली बार लिख रहा हु
    गुरु जी मेरे उपर राहू का भुत ला हुवा है एक तो शराब तम्बाकू और नशे की आदते लगी हुयी है , और मेरी सगाई अभी हुयी है पर मुझे मेरी साली या कोई दूसरी पसंद है ,. क्या करू
    11/12/1983 time 10.10 pm ,ahmedabad ,,कर्क लग्न , शतभिषा नक्षत्र
    मंगल तृतीय ,,शनि शुक्र तुला में , गुरु केतु सूर्य पंचम स्थान में , बुध षष्ठं , चन्द्र अष्टम , राहू एकादश में
    ReplyDelete

    ReplyDelete
    Replies
    1. सुनील जी यह एक बुरा वक्त ही कहा जायेगा जब इस राहु की बदौलत मर्यादा और संस्कार का असर समाप्त होता जा रहा है और खुद के जीवन के साथ साथ खुद की उस बुद्धि का विनाश हो रहा है जिसके लिये कालान्तर से लोग भटक कर अपने को उस ऊंचाई तक पहुंचाना चाहते है जो आपको जन्म से मिली हुयी है इस राहु के कारण आपके अन्दर एक प्रकार की बेलेन्स करने की क्षमता का विकास अपने आप होता है किसी भी बात का सन्तुलन करना भी आपके द्वारा जल्दी माना जा सकता है,हर काम मे जल्दबाजी का परिणाम भी आपके द्वारा करना एक प्रकार अहित ही माना जा सकता है,इस राहु के भूत को उतारने के लिये आप सामाजिक रूप से अपने को आगे ले जाये लोगो के हित के लिये अपने कामो को करे जिससे फ़ालतू का कारण दिमाग मे पैदा नही हो सके यात्रा वाले काम करना लोगो को धर्म न्याय और कम्पयूटर आदि के काम करवाना भी आपके लिये सही होगा भीड मे जो भी हित वाले काम होते है उन्हे करते रहने से भी दिमाग का कारण अपने आप बदलने से भी सहायता करने मे सही होगा.

      Delete
  13. गुरुजी प्रणाम,

    मेरे तथा मेरे परिवार की तरफ़ से आपको अापके परिवार सहित होली की हार्दिक शुभकामनाएँ .
    राकेश

    ReplyDelete
    Replies
    1. प्रिय राकेश,खुश रहो मजे करो फ़लो फ़ूलो राज करो.तुम सभी को भी होली की बहुत बहुत शुभकामनाये.

      Delete
    2. Sir mera naam shikha Srivastava h meri dob 12/08/1991, mera janm Monday ko subah 4 se 4:30 ke bich Hua tha.....meri job aur sadi ke bare me plz kuch Bata dijie please....

      Delete
  14. नमस्कार गुरु जी
    मे आप कि पोस्ट रोज पडता हु मुझे आप कि पोस्ट बहुत अच्छी लगी हे और मे आप के द्वारा लिखे शब्द बहुत बारीकी से पडता हु मेने आप के काफि लेख से ज्ञान प्राप्त किया हे मे चाहता हु कि मे आप कि लिखे लेख मे ज्योतिष का पाठ नः 1 से सिखना चाहता हु इस के लिए कया करु और मे ज्योतिष का ज्ञान सुरु से लेना चाहता हु A से Z तक

    ReplyDelete
    Replies
    1. गोविन्द जी ज्योतिष सीखना कोई बडी बात नही है केवल व्यवहारिक रूप से समझने की जरूरत होती है,अगर कहा जाये कि वेदोक्त नीति से ज्योतिष को सीखना है तो वैदिक युग की बाते सोचनी पडेंगी और आज के युग के रूप मे सीखना है तो ग्रह वही रहेंगे लेकिन कारकता का प्रभाव बदल जायेगा,ज्योतिष सीखने के लिये केवल पठन करना ही बहुत है कारण पठन किया हुआ वक्त पर याद आता है और कहा हुआ कभी कभी याद नही रहता है व्यक्ति के स्वभाव और जन्म समय के अनुसार मिलने वाली ग्रह युति शुरु मे देखने की जरूरत होती है,एक ग्रह के 12x12x9x9 भेद समझने की जरूरत होती है.ईश्वर आपकी सहायता करे.

      Delete
  15. PRANAM GURUJI,

    MAINE APKE SABHI LEKH PADHE HAI. PICHLE VARSH SE MAI APKE SABHI LEK PADH RAHA HOON. INHE PADHKAR HI MERE MAN ME JYOTISH KE PRATI VISHWAS BADHA HAI AUR MAINE BHI ISKA ADHYAN KARNA SHURU KAR DIYA HAI. APKE LEKH BAHUT VISHAD GYAN KI MANG KARTE HAIN . KABHI-2 TO JATIL LEKH SAMAJH BHI NAHI ATA. ABHI TAK LAGBHAG SABHI VISHYON PAR APNE LEKH LIKHE HAIN. PAR IS PAR KOI VISHESH LEKH ABHI TAK NAHI PADH PAYA HOON KI KISI "VYAKTI KA CHARITRA KAISE JANE". HUM YE KAISE JAAN SAKTE HAI KI STRI YA PURUSH ACHEE YA BURE CHARITRA KA HAI. KRIPYA IS PAR BHI EK VISHTRAT LEKH LIKHE TO BADI ANUKAMPA HOGI. ABHI TAK KISI SITE PAR AISA LEKH NAHI MIL SAKA HAI PADHNE KO.

    PAWAN SINGH

    ReplyDelete
  16. पवन जी किसी भी व्यक्ति के लिये चरित्र का कारक उसका वंशानुगत खून का प्रभाव माना जाता है खून का कारक मंगल होता है मंगल के साथ युति देने वाले ग्रह सौम्य है धर्म से जुडे है तो व्यक्ति का चरित्र हमेशा हमेशा के लिये सही होगा,इसके विपरीत चरित्र के प्रति खराब होगा,साथ ही राहु जब भी लगनेश आदि के साथ अपनी गोचर वाली स्थिति को रखेगा या जन्म से ही लगने के साथ या आगे पीछे अपनी युति को प्रदान करेगा तभी व्यक्ति के प्रति शंका प्रकट हो जायेगी.यह शंका जब राहु की युति हटेगी और गुरु की युति शुरु होगी तभी समाप्त हो सकती है,जन्म के राहु शनि की युति अगर व्यक्ति के लगनेश पर है तो व्यक्ति उम्र की बयालीस साल तक चरित्रहीनता की श्रेणी मे गिना जायेगा लेकिन इस उम्र के बाद वह चरित्रवानो की गिनती मे गिना जाने लगेगा,वृश्चिक राशि का व्यक्ति गुप्त मानसिक प्रभाव के कारण और हमेशा छुपी बाते करने और रहस्यों को प्रकट नही करने के कारण अक्सर बुजुर्ग होने पर भी चरित्रहीनता के प्रति अपने भाव प्रकट करते रहते है.

    ReplyDelete
  17. kundli ke anusae singh rashi ka hu or nam ke anusae tula rashi ka hu 2009se rahu mahadasha chalu ho gai hai kundli me rahu 11 ghar me hai

    ReplyDelete
  18. guru jee mera jabab abhi tak nahi aaya

    ReplyDelete
  19. Namashkar Guru ji
    mera name - Mandeep kaur
    birth date - 13/3/1990
    time- 10:15am
    place - jalandhar
    Guru ji meri shadi kab hogi
    mujhe to mere pita ji ka bhi sath nahi hai. unka dihant ho gya tha, jab main bhut choti thi
    or bhai ki bhi shadi ho gyi, vo amrica chala gya abhi vhan kam pe nahi lga
    main ik choti si job ker ke apne ghar gujara kerti hun or maa ki dekh bhaal kerti hun
    meri maa meri shadi ko leker bhut pare shan rehti hai
    plz btaiye ki meri shadi kab hogi or khan hogi
    india main hogi ya foreign country main hogi
    thanku guru ji

    ReplyDelete
  20. गुरु जी नमस्कार राहु की स्थिति सही करने के उपाय बताने की कृपा करें।

    ReplyDelete