Wednesday, August 1, 2012

अष्टम भाव और जीवन मे लिये जाने वाले जोखिम

अक्सर अष्टम भाव को मृत्यु के भाव से जाना जाता है और इसे अपमान तथा जोखिम के भाव से भी जाना जाता है इस भाव का कारक अस्पताल भी है और इस भाव से ही मौत का अन्दाज लगाया जाता है.प्रस्तुत कुंडली मे लगनेश सूर्य ने अपनी अष्टम द्रिष्टि से शनि वक्री और केतु को देखा है तथा सप्तमेश ने भी पंचमेश और अष्टमेश गुरु को जो नीच के है और छठे भाव मे है को अष्टम से देखा है,मंगल जो वक्री है ने नवे भाव से लगनेश को अष्टम से देखा है। यह एक स्त्री की कुंडली है। जातिका की शादी एक डाक्टर से हुयी है,पति का कारक शनि वक्री है और केतु के साथ है,मार्गी शनि होने पर व्यवहारिक कार्य शरीर की मेहनत से किये जाते है,वक्री होने पर जो भी काम किये जाते है वह बुद्धि से किये जाते है और और केतु के साथ होने से बुद्धि से जो भी सहायक होते है उनसे कार्य के अलावा अन्य रिस्ते भी बनाने के कारण भी देखे जाते है। शनि केतु के द्वारा अष्टम से गुरु नीच को देखे जाने तथा गुरु नीच का छठे भाव मे होने से जो कर्जा दुश्मनी बीमारी आदि के कार्य होते है के लिये कार्य करना माना जाता है,जातिका पति जो शनि के रूप मे है अपनी निगाह मे डाक्टरी काम करने और पंचम का स्वामी होने से दिल फ़ेंक व्यक्ति की हैसियत भी रखता है उसके लिये सामाजिक रिस्ते बनाना और बनाकर चलना एक अजीब बात ही मानी जाती है.जातिका के पंचम भाव से जातिका की सन्तान के लिये भी देखा जा सकता है शुक्र राहु और चन्द्र शनि केतु से युति लेकर एक पुत्र और एक पुत्री को प्रदान कर रहे है और जातिका शनि का लगनेश शनि केतु को अष्टम द्रिष्टि से देखे जाने से जैसे ही जातिका का पति अलावा रिस्ते बनाने के लिये अपनी नजर शुरु करता है जातिका इन्ही शनि केतु को एक वकील की हैसियत से वकीलो का सहारा लेकर अपनी वैवाहिक जिन्दगी को बचाने की कोशिश करती है.पति जो डाक्टर है वह अपने शनिकेतु वाले दिमाग को प्रयोग करने के बाद जो भी सहायक काम करने वाली नर्से आदि होती है उनसे रिस्ते बनाकर शादी आदि की बात शुरु कर देता है। शनि वक्री हो और बुध भी वक्री हो तथा केतु के साथ हो तो अक्सर यह बात उन लोगो के अन्दर भी देखी जाती है जो लोग पहले तो बहिन का रिस्ता चलाने की कोशिश करते है और जैसे ही उनके चंगुल मे बहिन का रिस्ता आजाता है वह बहिन को पत्नी बनाने की कोशिश मे लग जाते है। यह तब और अधिक होता है जब राहु शुक्र शनि वक्री केतु और शनि वक्री केतु की नजर वक्री बुध पर बनी रहे.गुरु का नीच होना ही इस बात के लिये सूचित करता है कि व्यक्ति रिस्ते के नाम पर एक तो नाजायज फ़ायदा लेने की कोशिश करता है दूसरे जो भी लोगो को कार्य के बाद कार्य फ़ल प्रदान करने की बात होती है उसके लिये भी यह गुरु अपनी हरकत से बाज नही आता है यह गुरु नौकरी के नाम पर महिलाओ को अपने पास रखता है और बाद मे उनसे सम्बन्ध बनाकर अनैतिकता मे भी चला जाता है।

8 comments:

  1. Excellent analysis, specially regarding Shani and Ketu. Your perception of conjunction of Vakri Shani with Ketu and the effect a Vakri Shani gives to husband if he the lord of 7th house along with its relation to patikarka Guru is very good.

    Effect of neecha guru is very prominently described here.

    This is a must read of every student of astrology.

    Only point is that Surya and Chandra are said to have no drishti and they illuminate the zodiac equally. Thus eight house aspect of Surya cannot be understood.

    Thanks

    Vikas Goyal
    www.vedicjyotish.info

    ReplyDelete
  2. अति सुंदर गुरु जी ....आठवा अस्त शुक्र भी स्त्री से अपमान दिलाता हैं.....

    ReplyDelete
  3. विजय लक्ष्मी जी सूर्य की अष्टम द्रिष्टि भी उसी तरह से मानी जाती है जैसे बाकी के ग्रहों की लेकिन साधारण ज्योतिष मे इसका फ़लकथन नही किया गया है,लालकिताब के अनुसार यह कथन मिलता है कि किसी भी भाव की लगन अपने से सप्तम से मंत्रणा करती है अष्टम से देखती है और ग्यारहवे से नतीजा देती है,यानी लगन सिंहासन है सप्तम मंत्री है अष्टम आंखे है ग्यारहवा चलने वाले पैर माने जाते है उसी प्रकार से गुरु के लिये भी एक बात जरूरी मानी जाती है कि वह वह अगर नीच है और नीच भाव को भी अपनी द्रिष्टि से देखता है तथा उस नीच का फ़ल भी तब और खराब हो जाता है जब गुरु एक चोर भाव मे बैठ कर चोरी से ग्यारहवे भाव को देखे,(छठे से छठा) और इस तरह की बाते तब और भी समझ मे आती है कि गुरु जो सम्बन्ध का कारक है और वह चोरी से अपने साथ काम करने वाले लोगो से मित्रता को बढाकर उनसे अपनी अनैतिकता को पूर्ण करता है तो वह बहुत ही खतरनाक हो जाता है.सूर्य और चन्द्रमा के लिये भी माना जाता है कि वे जिस स्थान पर होते है उस स्थान से अपने अष्टम को उखाड कर फ़ेंकने के लिये और अपने से दसवे स्थान के साथ विश्वासघात करने के लिये योजना जरूर बनाते है बशर्ते कोई उनका दुश्मन राहु केतु शुक्र शनि उन्हे रोक नही रहा हो तो.आपके द्वारा पसंद करने के लिये आभार.

    ReplyDelete
  4. कपूर जी एक बात और भी मानी जा सकती है कि अस्त शुक्र अगर मेष सिंह धनु या लगन पंचम नवम मे है और ग्यारह डिग्री से कम है तो वह जरूर ही अपमान करता है कारण वह अहम से भरा होता है उसके अन्दर इतनी गर्मी होती है कि पति उससे रति सम्बन्धो मे हार जाता है और इन्ही कारणो से अक्सर औलाद के नाम पर मिस कैरिज अधिक होते रहते है और नर संतान एक ही टिक पाती है वह भी बडे होकर पिता को कुछ भी नही समझती है,आपके द्वारा लेख पसंद करने के लिये आभार.

    ReplyDelete
    Replies
    1. pranam guruji aap face book par kab lout rahe hain...

      Delete
  5. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  6. kanya lagna ki kundali mai ashtham sthaan mai ravi aur rahu ki yuti ka kya phal hai.

    ReplyDelete
  7. कन्या लगन की कुंडली मे सूर्य बारहवे भाव का मालिक होता है यह भाव पिता परिवार मे पिता के बडे भाई से भी जोड कर देखा जाता है साथ ही पिता की आंखो की कमजोरी और परिवार दादा के जमाने की हैसियत भी अच्छी मानी जाती है,लेकिन किसी सरकारी अथवा खुद की बनायी संस्था से बदनामी भी मिलती है.जातक के लिये यही कारण आगे चलकर खुद के जीवन के लिये हर पूर्वज की रीति रिवाज को बेलेंस करने के बाद देखा जाता है जो कारण जातक को अति भौतिकतावादी बना देते है.

    ReplyDelete