Tuesday, December 20, 2011

चतुर्थांश यानी भाग्य

कुंडली विवेचन मे चतुर्थांश के बिना फ़लादेश करना उसी प्रकार से है जैसे गर्मी की ऋतु में दूर रेगिस्तान में मृग मारीचिका को जल समझ कर भागना। लगन कुंडली शरीर के लिये चन्द्र कुंडली मानसिक रूप से संसार के लिये नवमांश कुंडली जीवन साथी और जीवन की जद्दोजहद के लिये सप्तांश कुंडली संतान सुख के लिये होरा कुंडली धन सम्पत्ति के लिये देखी जाती है उसी प्रकार से चतुर्थांश कुंडली को भाग्य के लिये देखना बहुत जरूरी होता है। एक जातिका की कुंडली का विवेचन प्रस्तुत है,यह जातिका बिजनौर उ.प्र. में दिनांक २४ दिसम्बर १९७८ को शाम ६ बजकर ३० मिनट पर पैदा हुयी है। जातिका की मिथुन लगन है और चन्द्र राशि कन्या है,लेकिन जातिका का नाम तुला राशि से रखा गया है। इस कुंडली मे लगन को बल देने वाले ग्रह सूर्य मंगल और केतु है.सूर्य छोटे भाई बहिन का कारक है और मंगल चाचा और बडे भाई का कारक है,केतु जातिका की दादी और नानी के लिये माना जायेगा.जातिका के शरीर की पालन पोषण की जिम्मेदारी इन्ही तीनो पर है.लगनेश बुध छठे भाव मे है और बुध के साथ वक्री गुरु अपनी स्थिति को दे रहा है। लगनेश का स्थान वृश्चिक राशि मे होने के कारण जातिका को नौकरी और गूढ ज्ञान की अच्छी जानकारी है। शरीर का मालिक बुध छठे भाव मे होने के कारण जातिका को अनुवांशिक बीमारी से भी ग्रस्त माना जाता है। चन्द्र शुक्र और बुध तीनो ही राहु शनि सूर्य मंगल के बीच मे होने के कारण यह अनुवांशिक बीमारी माता के परिवार से मानी जा सकती है। वैसे ज्योतिष के अनुसार सूर्य हड्डियों का कारक होता है चन्द्रमा शरीर के पानी का कारक है,मंगल रक्त का कारक है,बुध स्नायु का और नसों का कारक है,गुरु शरीर की वायु का कारक है,शुक्र शरीर की सुन्दरता का कारक है शनि बाल खाल त्वचा का कारक है,राहु जिस ग्रह के साथ होता है उसी की बीमारी को देता है,केतु का असर जहां तक होता है वहां तक वह अपना असर सहायता के लिये देना माना जाता है। वैसे केतु को भी शरीर के जोड प्रयोग किये जाने वाले अंगो केलिये माना जाता है। राहु का शनि के साथ होने से जातिका को त्वचा की बीमारी है,शनि से आगे चन्द्रमा के होने से त्वचा में सफ़ेद रंग के दाग माने जाते है राहु शनि की तीसरी पूर्ण द्रिष्टि शुक्र पर पडने के कारण शरीर की सुन्दरता पर ग्रहण दिया हुआ है,इसी के साथ केवल राहु की पंचम द्रिष्टि मंगल और सूर्य पर पडने के कारण खून के अन्दर इन्फ़ेक्सन और शरीर के ढांचे में भी ग्रहण दिया माना जाता है यह राहु का प्रभाव जातिका के बडे और छोटे भाई बहिनो पर भी है। लेकिन एक बात का और भी सोचना जरूरी होता है कि राहु के पास वाले ग्रह और भाव अगर दिक्कत देने वाले होते है तो केतु के आसपास वाले ग्रह और भाव दिक्कतो से बचे रहने वाले भी माने जाते है। अगर राहु शरीर के प्रति अपनी सुन्दरता मे कमी देने का कारक है तो केतु उस सुन्दरता में अपनी योग्यता से उसे बुद्धिमान बनाने के लिये भी अपनी योग्यता को दे रहा है। सबसे अधिक प्रभाव जातिका के जीवन मे भाग्य के प्रति माना जा सकता है,अगर चतुर्थांश की कुंडली को बनाया जाये तो इस प्रकार से कुंडली का निर्माण होगा :-
जातिका के चतुर्थांश में कालपुरुष की दो त्रिक राशियां मीन और वृश्चिक जातिका के लगन और नवे भाव मे है,तथा तीसरी त्रिक राशि सप्तम यानी पति के स्थान मे है। इन तीनो त्रिक राशियों का प्रभाव जातिका के जीवन में आजीवन रहना निश्चित है।लगन कुंडली मे जैसे राहु का प्रकोप जातिका के प्रदर्शन यानी तीसरे भाव मे शनि के साथ है तो भाग्य मे भी राहु का प्रकोप बुध के साथ तीसरे भाव मे ही है। यहां शरीर की सुन्दरता पर असर देने वाले राहु और केतु दोनो ही है,गुरु के वक्री होने के कारण और बारहवे शनि से गुरु की युति होने के साथ साथ गुरु का प्रभाव मंगल और चन्द्र पर भी है। भाग्य मे चन्द्रमा का साथ मंगल के साथ होने से और चन्द्रमा से गुरु वक्री के साथ पंचम सम्बन्ध होने तथा चन्द्रमा से भाग्य में नवे भाव मे शनि के होने से माता के दोष से ही जातिका का भाग्य विदीर्ण होना माना जायेगा। माता के बारहवे भाव में बुध राहु के होने से झूठ बोलना और फ़रेब से अपना काम बनाने की युति रखना तथा बुध से सप्तम में वृश्चिक का केतु होना इस बात की तरफ़ इशारा करता है कि कोई जायदाद जो मृत्यु के बाद किसी को मिलनी थी वह जायदाद झूठे कारण से खुद के लिये प्राप्त करने के कारण यह राहु का दोष बुध यानी लडकी पर स्थापित हो गया। यह एक प्रकार का अभिशाप भी कहा जाता है जो अन्तर्मन से दिया जाता है। चन्द्रमा के आगे शुक्र के होने से जातिका की माता ने अपने स्वार्थ के लिये व्यापार करने वाला स्थान या रहने वाला घर अथवा कोई सरकारी क्षेत्र का अधिकार झूठ से प्राप्त किया जाना भी मिलता है इस कारण से सन्तान यानी वक्री गुरु पर राहु का असर होने से और गुरु वक्री से आगे केतु के होने से सन्तान को सब कुछ प्राप्त होने के बाद भी कुछ नही होना माना जा सकता है,अक्सर चन्द्रमा से वक्री गुरु के पंचम मे होने से गुरु अपने पुरुष प्रभाव को छोड कर वक्री होने पर स्त्री प्रभाव को बली कर देता है और बजाय पुरुष सन्तान के स्त्री संतान का होना माना जाता है। इस प्रभाव से जातिका की माता को भी छठा केतु होने के कारण शरीर के जोडो और जननांग सम्बन्धी बीमारियां इन्फ़ेक्सन और गुदा सम्बन्धी बीमारियां भी परेशान करने के लिये मानी जा सकती है।
गुरु के वक्री होने से एक बात और भी समझी जा सकती है कि जो व्यक्ति अपनी चालाकी से किसी असहाय की सम्पत्ति को हडप कर उसे अपनी संतान के लिये प्रयोग मे लाना चाहते है समय की मार शुरु होते ही वह असहाय की हाय जातक के जीवन को तबाह करके रख देती है। चतुर्थांश में गुरु के अष्टम में वक्री होने के इस रूप को भली भांति समझा जा सकता है। जातिका पूर्ण रूप से दिमागी ताकत से पूर्ण है,जातिका को बुद्धि वाले काम करने की पूरी योग्यता है,जातक के सभी अंग सुरक्षित है लेकिन त्वचा पर सफ़ेद दाग होने से जातिका की शादी विवाह और सम्बन्धो के मामले मे दिक्कत है। इस गुरु के वक्री होने पर अक्सर जातक के सन्तान में पहले तो सन्तान सुख होता ही नही है और होता भी है तो केवल पुत्री सन्तान हो जाती है जो शादी के बाद अपने ससुराल जाकर माता पिता को अकेले छोड जाती है। गुरु की सिफ़्त के अनुसार अगर वक्री गुरु होता है तो वह जल्दबाजी का कारक भी होता है इस गुरु के आगे घर मे बजाय पुरुष वर्ग के चलने के स्त्री वर्ग की अधिक चलती है और वह अपनी ही सन्तान और परिवार को अधिक देखने के कारण तथा अन्य लोगों के साथ दुर्व्यवहार रखने से भी अपनी भाग्य की शैली को अन्धेरे मे डाल कर रखती है।

6 comments:

  1. गुरूजी प्रणाम,

    बहुत ही ज्ञानवर्धक विवेचना है.
    सुदर्शन चक्र कुंड़ली में कैसे देखते हैं! कहीं नहीं मिल पाया. आप ही कुछ प्रकाश ड़ालें.

    प्रणाम

    आशुतोष जोशी

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  2. जोशी जी जल्दी ही आपकी इच्छा को पूरी करने की कोशिश करूंगा.

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  3. GURU JEE PARNAM, BHUT HI INTERSTING LEKH HAI,KIRPA AUR BHI ASI KUNDLIO PER SARAL VIVACHAN DATE RAHE .

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  4. गुरु जी प्रणाम मेरी जन्म तिथि 22-05-1988 है प्रातः02:35 बजे है स्थान हल्द्वानी |
    गुरु जी क्या मेरी कुण्डली सरकारी नौकरी का योग है
    दिनेश शास्त्री

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  5. गुरु जी प्रणाम मेरा जन्म तारीख --13/08/1978,टाइम--17.50.00,Place--Risora,रायगढ़, छड़िशगढ हे,में कुंडली के समस्त भाव
    के यानी मेरा जीवन के हर पहलू दुखदाई होराहाहे । विश्लेषण के आधार से मुझे बताने की कृपा करें।

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  6. Govt job lagegi ya nahi Or kab tak

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