Monday, October 29, 2012

गाली ज्योतिष से.

 कानूनी रूप से गाली देने के लिये अलग अलग देशो मे अलग अलग धारायें लगती है और साबित होने पर कि अमुक को अमुक के द्वारा गाली देकर मानसिक रूप से आहत किया गया है तो गाली देने वाले को धन और शरीर से सजा भी झेलनी पडती है। गाली का क्यों दी जाती है कौन से ग्रह गाली देने के लिये अपनी युति प्रदान करते है कुंडली मे गाली देने से क्या लाभ और हानि होती है आदि बातो पर चलिये विवेचन करते है।

खुद को भी गाली दी जाती है जानते हुये भी काम को खराब खुद के द्वारा कर दिया जाता है तो मन मे गाली उपज जाती है,और खुद के द्वारा ही खुद को गाली दी जाती है यह बात राहु जब लगन मे होता है और दिमाग भ्रम मे चला जाता है तो काम बनता हुआ भी खराब हो जाता है अकेले मे बैठ कर जब बिगडे काम को सोचा जाता है तो गाली खुद के लिये भी निकलती है और खुद को लोग कम ही गाली देते है ईश्वर को और समय को दोष देकर गाली देने लगते है। यह बात लगन के लिये प्रयोग मे ली जाती है।

पंचम भाव संतान का होता है अगर पिता को पुत्र गाली देता है तो यह देखा जाता है कि पिता की गलत नीति भी हो सकती है पिता का अपने समाज के द्वारा चलायी जाने वाली मर्यादा से दूर होकर चलना होता है या सब कुछ होते हुये भी पिता के द्वारा पुत्र के प्रति वह काम नही किये जाते है जिनसे पुत्र की प्रोग्रेस हो रही हो,लेकिन पुत्र जब पिता को गाली देता है तो पिता का मृत्यु जैसा कारण बन जाता है,जैसे मौत भी आठ प्रकार की होती है और एक मौत यह भी कहलाती है कि पिता को पुत्र गाली दे।

नवा भाव धर्म का होता है और भाग्य का भी होता है लेकिन नवा भाव साली का भी होता है और देवर का भी होता है साली अगर गाली देती है तो बहुत अच्छी लगती है उसी जगह पर जब भाभी देवर को गाली देती है तो भी अच्छी लगती है इसके लिये एक बात को और भी देखा जाता है कि सप्तम जीवन साथी का होता है और जीवन साथी का पराक्रम नवा भाव होता है जीवन साथी का पराक्रम जितना अच्छा प्रभावी होता है उतना ही गाली खाने का सुख भी अलग से बहुत मायने रखता है। देवर अगर भाभी की गाली खाता है तो भाभी की मान्यता हंसी मजाक मे गाली देने के लिये मानी जाती है और लोग चलकर भाभी को छेडने का उपक्रम रचते है जिससे भाभी गाली दे और माहौल मे चलती हुयी नीरसता मे सरसता का प्रभाव शुरु हो जाये। उसी स्थान पर जब ससुराल मे साली खुद को गाली देती है तो भी सुनने मे अच्छा लगता है लोग ससुराल जाते भी इसी लिये है कि वे गाली सुने और प्रहसन को महसूस करे। नवा भाव दसवे का बारहवा होता है यह भाव किये जाने वाले कर्म का मोक्ष स्थान होता है जब काम से मन दूर होने लगता है तो प्रहसन का कारण लोग बनाने लगते है। क्योंकि नवा भी पंचम का पंचम है और पंचम जब मनोरंजन का है तो मनोरंजन से मनोरंजन को प्रकट करने वाला भाव भी नवा हो जाता है।

पति पत्नी को गाली देता है पत्नी भी पति को गाली देती है। पति पत्नी को तभी गाली देता है जब पति के अनुरूप पत्नी काम नही करती है। गाली देने का कारण हर भाव के बारहवे भाव से पैदा होता है जैसे पुत्र को गाली दी जाती है तो पुत्र के बारहवे भाव चौथे को सामने लाकर माँ की गाली से नवाजा जाता है साली को गाली दी जाती है तो अष्टम के शब्दों को प्रयोग मे लाया जाता है जो शब्द किसी न किसी प्रकार से यौन सम्बन्धो से जुडे होते है यही बात देवर के लिये भी देखी जाती है। पति जब पत्नी को गाली देता है तो गाली मे खुद के छठे भाव का रूप सामने होता है जैसे खुद का शरीर से स्वस्थ नही होना,काम का बोझ अधिक होना,नई नई शादी के बाद अधिक यौन सम्बन्धो से सिर का भारी रहना और शरीर मे बल की कमी हो जाना,शरीर मे अधिक यौन सम्बन्धो से बल की कमी होने से रोगो का प्रभावी हो जाना बुखार या टीबी जैसी बीमारी का हो जाना अधिक कमजोरी से माथे के भारी होने से काम मे मन नही लगना और जो करना उस काम का खराब हो जाना आदि बातो से होने वाली आय मे कमी हो जाना एक तरफ़ घर वालो की जिम्मेदारी एक तरफ़ पत्नी की जिम्मेदारी पत्नी और घर के सदस्यो या माता के सामजस्य को बैठाने मे तथा मानसिक कारणो के समझने या समझाने मे (चौथे से चौथा) भ्रम या कनफ़्यूजन से बात का बढते जाना आदि बाते मानी जाती है।

गाली मन को आहत करती है। सम्बन्धित भाव के चौथे भाव का मालिक जब राहु शनि मंगल सूर्य के साथ होता है तो गाली का रूप मे मन मे पैदा हो जाता है या तो गाली देनी पडती है या गाली सुननी पडती है। शनि जब अष्टम मे होता है तो गाली सुनने मे मजा आता है वह गाली चाहे जैसी भी हो,इसके साथ ही लगनेश का अष्टम मे होना आजीवन गाली सुनने का कारण बनता रहता है। बुध जब अष्टम मे हो तो आजीवन गाली देने की आदत बन जाती है,एक तकिया कलाम भी बोलते समय बन जाता है जो गाली के रूप मे भी हो सकता है और जब बुध के साथ चन्द्रमा अपने गोचर से चलता है तो गाली का रूप मजाकिया होता है बुध के साथ मंगल चलता है तो गाली कडे शब्दो की होती है इस युति मे अगर शनि की क्रिया भी गलत भावो से होती है तो गाली के बाद मरने मारने की बात भी सामने आजाती है रिस्ते खत्म हो जाते है लोगो को बडे से बडा नुकसान भी झेलना पडता है। लेकिन हर गाली के पहले का रूप केवल हंसी या प्रहसन ही होता है। बात को बढाने के लिये केवल अपनी पूरी जानकारी सामने वाले के पास होती है गाली को केवल मंगल का डर ही दबा सकता है बाकी मानसिक रूप से गाली देने को बददुआ भी कहा जाता है।

ग्रामीण परिवेश मे महिलाये अक्सर अपने पति को गाली देने के लिये उल्टा सीधा काम करती है और जान बूझ कर भी चिढाने का प्रयास करती रहती है जिससे उनका पति गाली दे और आसपास के लोग समझे कि उस महिला का पति कितना गुस्सेबाज है। जब उस महिला से कहा जाता है कि उसका पति गाली देता है उसका जबाब क्यों नही देती है तो वह महिला कहती है- "अन्न की छार पिया की गारी,कबहुं ने मेटे नाथ हमारी",यानी घर से अन्न भोजन और पति की तेज तर्रार तथा गाली बातें ईश्वर उस महिला को हमेशा देता रहे।पति और पत्नी का रिस्ता उसी प्रकार से माना जाता है जैसे मुकद्दमा मे पक्ष और विपक्ष का होता है। मुकद्दमा चलने का कारण भी दूसरा भाव और अष्टम भाव होता है तो विवाह के बाद पति पत्नी के लिये भी आपसी सामजस्य दूसरे और अष्टम से जुडा होता है। अगर पक्ष और विपक्ष के दोनो भावो के ग्रह बली है तो आजीवन मुकद्दमा चलता रहता है उसी प्रकार से विवाह मे भी पति पत्नी के दोनो भावो के ग्रह मजबूत है तो आजीवन सम्बन्ध चलता रहता है। मुकद्दमे का न्याय जज करता है और पति पत्नी के सम्बन्धो का न्याय उनके द्वारा किये गये कर्म और प्रकृति करती है।

हिन्दी के जिस शब्द के अन्त मे अक्षर "ली" लगा होता है वहां पर गाली का कोई न कोई रूप सामने आजाता है,जैसे साली रिस्ते से गाली गलौज में घरवाली आजीवन की जद्दोजहद मे हमाली आदेश से काम करने वाले के प्रति दलाली खरीद बेच मे कमीशन के कम अधिक होने पर या ली जाने वाली चीज की गुण्वत्ता पर,ख्याली यानी काम नही करने पर और सोचने से ही जरूरतो को पूरा नही करने पर मलाली यानी समय की कीमत नही पहिचाने जाने पर समय का मूल्य नही मिलने पर असली को नकली के द्वारा बेअकली को अकली के द्वारा चली को बिना चली के द्वारा आदि शब्दो से सोचा जा सकता है।

जीवन मे गाली की बहुत बडी महत्ता है,शब्दो के द्वारा कार्य को बना दिया जाना या बिगाड दिया जाना,कोई रास्ता चलते अनजान व्यक्ति बुरी गाली देता है तो गाली देने वाले का सिर फ़ोड दिया जाता है। गाली तो शब्दो से दी गयी थी लेकिन कार्य शरीर ने कर दिया। अगर गाली का उद्देश्य समझ लिया जाता तो भी बहुत बडी बात सामने होती कि एक सीख मिल जाती या एक प्रकार की सहनशीलता का कारण बन जाता। पति पत्नी की गाली गलौज दोनो के प्रति तभी कारण रूप मे बनती है जब दोनो मे ही पति किसी न किसी प्रकार से कमजोर होता है,पति पत्नी की जीवन के क्षेत्र मे बराबर की लडाई मानी जाती है अगर पत्नी किसी भी बात मे हर बार जीत जाती है तो वह पति को अन्दरूनी रूप से आहत करती रहती है और उस आहत होने का जबाब गाली गलौज से शुरु हो जाता है,इस प्रकार पति का दूसरा और अष्टम कमजोर होना माना जाता है यानी धन या भोजन की कमी और कामसुख और गुप्त बातो से अन्जान होना,इसी प्रकार से पत्नी भी तभी पति पर हावी हो सकती है जब वह दूसरे और अष्टम को सबल रखती हो यानी अपने परिवार धन और बातो से तथा गुप्त जानकारी रखने के बाद पति की हर बात का पता रखने पर और अन्दरूनी बातो को हर प्रकार से जानने पर। पति पत्नी मे गाली सामयिक ही होती है कभी भी लम्बी चलने वाली नही होती है समझदार लोग गाली देने वाले को और अधिक गाली देने के लिये उत्साहित करते है और चाहते है कि वह पूरी तरह से उत्तेजना मे आजाये और कोई अहित करने की सोच ले,जैसे ही सामने वाला अहित करने की सोचता है समझदार लोग गाली देने वाले को अपने शिकंजे मे ले लेते है,लेकिन जो समझदार नही होते है वह गाली देने वाले के समानान्तर मे गाली देना शुरु कर देते है,परिणाम मे खुद का भी बुरा कर लेते है और सामने वाले को आगे बढने का मौका भी देते है। कहा भी गया है- गाली आवत एक है,उलटत होय अनेक,जो कबीर चुपि हो रहे तो वही एक की एक यानी गाली देने वाले ने गाली दी है और उसका जबाब गाली से न दिया जाये और चुप रहा जाये तो गाली देने वाले को प्रतिउत्तर नही मिलने पर वह गाली एक ही रह जायेगी।

7 comments:

  1. गुरुजी प्रणाम,
    गुरुजी एक बात बताने का कष्ट करे की दैनिक कुडंली में अपनी कुडंली कैसे देखे मेरा मतलब अगर आज की कुडंली मकर से शुरु है तो वही से या अगर मेरा लगन वृष है तो वहाँ से.
    धन्यवाद

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  2. रोजाना की कुंडली बीजगणित के नियम से देखी जाती है,+ और + धनात्मक होते है,- और - भी धनात्मक होते है,जबकि - और + तथा + और - दोनो मिलकर - का फ़ल ही देते है यह सब जीवन मे चलने वाली घटनाये आगे आने वाली बाते अक्समात या देर से होने वाली घटनाओं के लिये देखना होता है.

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  3. गुरुदेव........
    सादर नमन
    पहली बार आपके ब्लॉग पर आया . लगभग सभी पोस्ट पड़ी .......बहुत सुन्दर प्रस्तुति , क्या आप मेरी समस्या का निवारण करेंगे ,आपकी बड़ी कृपा होगी....

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  4. मेरी माता जी मेरे विवाह को लेकर चिंतित रहती हैं ... क्या आप मेरी कोई मदद कर सकते हैं ....आप की बड़ी कृपा होगी .....
    जन्म दिनांक :- 26\02\1986
    जन्म समय :- 8:19 am [जन्म समय मैं थोडा सा संशय हे अगर आप इसे संशोधित कर सके तो बड़ी कृपा होगी .....]
    जन्म स्थान :- झाबुआ [मध्य प्रदेश ]

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    1. प्रतीक जी आपकी मीन लगन है और कन्या राशि है,सप्तम मे चन्द्रमा के होने से शादी विवाह जैसे मामले मे नौकरी के मामले मे साझेदार के मामले मे कोर्ट केश और पारिवारिक रूप से पिता से बडे भाई आदि के द्वारा छल किया माना जाता है,वैसे भी आपकी राहु की दशा चल रही है और इस दशा के चलते जैसे ही कोई बात शादी सम्बन्ध के लिये बनायी जायेगी वैसे ही कोई न कोई कनफ़्यूजन आपके सामने आजायेगा या तो जिस व्यक्ति से शादी की जा रही है उसके परिवार के प्रति होगा या आपके द्वारा किये जाने वाले कामो के प्रति आपके परिवार के प्रति लोगो के अन्दर एक प्रकार का वहम बना रहेगा,इस प्रकार से जितने भी रिस्ते वाली बाते की जायेंगी वह केवल आशंकाओं की बजह से नही बन पायेंगी। फ़रवरी दो हजार नौ से जुलाई दो हजार ग्यारह तक एक सम्बन्ध बने रहने या अफ़ेयर आदि का कारण मिलता है जो उपरोक्त तारीख के बाद टूट गया माना जाता है,आप राहु के उपाय करो,ननिहाल खानदान की सहायता लो,शनिवार के दिन नीले कपडे में हल्दी चावल एक तांबे का सिक्का बांध कर किसी मन्दिर मे दक्षिणा के साथ रखो.

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    2. गुरुवर
      आपने आपका अमूल्य समय दिया इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ .............
      प्रभु कृपया राहू की दशा कब समाप्त होगी एवं विवाह के योग कब तक बनेंगे बता देने का कष्ट करें एक बार सगाई होकर छूट चुकी हे इसलिए माता जी चिंतित रहती हे...
      आपकी अमूल्य सलाह के लिए धन्यवाद.....

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