Saturday, October 22, 2011

संतानहीनता कारण और निवारण

कहने को तो सभी जमीन एक सी ही होती है,लेकिन जमीन के जो रूप है वे अलग अलग होते है।कहीं जमीन का रूप ऊसर जैसा होता है,देखने मे बहुत सुन्दर लगती है सफ़ेद और रात मे भी चमकने वाली,लेकिन बीज का दाना बोने के बाद उसका भी पता नही चलता है,जमीन का रूप पथरीला होता है,देखने मे बहुत ही मजबूत होती है,जरा सा टुकडा भारी चोट मार सकता है,लेकिन बीज बोने के बाद वैसा का वैसा ही रखा रहता है। जमीन का रूप बिलकुल गीला होता है,बीज को जमाने की गर्मी ही नही होती है,जमीन का रूप रेतीला होता है बीज को जमने के लिये नमी का अता पता नही होता है,यह प्रकार जमीन के माने गये और भी कई प्रकार की जमीन होती है,ढालू जमीन भी होती है समतल जमीन भी होती है और पठारी भी जमीन होती है तो मरुस्थल वाली जमीन भी होती है। जिस जमीन के अन्दर बीज को जमाने के ही तत्व जैसे गर्मी नमी वायु की अनुकूलता नही हो तो वह जमीन बीज को कैसे जमायेगी। यही प्रकार स्त्री जातको का होता है,जिस ग्रह युति मे स्त्री जातक का जन्म होता है उसी ग्रह युति से पंच तत्व का समावेश स्त्री के अन्दर होता है,अगर मंगल की अधिकता हो जाती है तो गर्मी की अधिकता मानी जाती है,चन्द्रमा की अधिकता होती है तो नमी की मात्रा अधिक हो जाती है,बुध की अधिकता होती है तो पृथ्वी तत्व की अधिकता हो जाती है गुरु का तत्व अधिक हो जाता है तो जीव के प्रति सोच तो होती है लेकिन पालक की क्षमता का विकास नही हो पाता है शुक्र की अधिकता होती है तो सन्तान को पैदा करने की क्षमता तो होती है लेकिन अलावा तत्वो की कमी के कारण पोषण की कमी रह जाती है।

अक्सर मंगल शुक्र की युति मे देखा जाता है कि स्त्री के अन्दर संतान के विकास की कमी पायी जाती है,जिसके कारण अधिकतर मिस कैरिज जैसी घटनाये हो जाती है,मंगल गुरु की अधिकता में बच्चेदानी का मुख बडा हो जाता है जिससे भी संतान का गर्भ मे टिक पाना नही हो पाता है। अष्टम मे शनि होने से भी स्त्री जातक का अधिक शीत प्रभाव के कारण भी संतान का नही होना पाया जाता है।चन्द्र शनि की युति में भी जातिका का स्वभाव अपनी मानसिक चिन्ताओं के कारण रुग्ण शरीर वाला हो जाता है जिससे भी स्त्री जातक को ल्यूकोरिया जैसे रोग हो जाते है। राहु का गोचर से या जन्म से पंचम भाव सप्तम भाव या अष्टम भाव मे होना भी इन्फ़ेक्सन की बीमारिया या इसी प्रकार के रोग पैदा हो जाते है जिससे रज और शुक्राणुओं की उत्पत्ति मे बाधा पैदा हो जाती है। बुध की अधिकता के कारण या बुध के अष्टम मे बैठने के कारण बच्चा दानी या जननांग मे गांठ का पैदा हो जाना या बच्चेदानी का मुख नही खुलना किसी प्रकार से नर्व सिस्टम का महत्वहीन होना भी संतान की बाधा के लिये माना जाता है।

2 comments:

  1. Ramender ji bahut acchi jankari di hai aapne ,budh ki adhiktake karan ya budh ke astem me baitthane ke karan baccha dani ka mukh nahi khulta to us ka aap ke pas
    kya upai hai? kirpya upai batane ka kast kare aap ki bahut kirpa hogi ,meri email hai o_mprakash@yahoo.in mail jarur karna ji dhanyawad.

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